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हट काचर रा बीज

भेऴी हूगी अमोस पून्यू  भेऴी तेरस तीज  वोट ले'र सरपंचा बोल्या  हट काचर रा बीज  पग झाल्यां परभात उघड़ी  गिया नोटां में भीज  देसी पी'र ढेंकड़्यां केवे  हट काचर रा बीज  बळतीया के लाय लागी  हुई प्रोपर्टीयां सीज  आखा देख गरूजी बोल्या  हट काचर रा बीज  दियाळी रा होळी धोकी  राखी ने आखा तीज  सरपंचा रा भाग फुटग्या  हटट काचर रा बीज  फेर चुनाव वोट ने आयो  गिया देवणिया खीज़  लात मार सरपंच ने बोल्या  हट काचर रा बीज  घणी दिराई फांक्यां टिकड़्यां  घणी दिराई चीज़  दारू मायां गांव डूबग्या  हट काचर रा बीज
हाल की पोस्ट

नाथ

   "पापा काई लाया?" भोलू चौखट में बड़ते बाप ने देख 'र केयो "साग लाया बेटा, ले टमाटर खा ले" एक गल्यूडो टमाटर बेटे सामी कर के जगलो पिता भाव देखायो। "ओ कई है पापा?" बाप री जेब सामी आंगली कर के भोलू बोल्यो "ओ, ओ तो पर्चो है बेटा, इरे माथे गोरख नाथ जी रो फोटू है, आंपा छप्परिये में लगावां" बाप बोल्यो "नाथ कई हुवे पापा" भोलू बोल्यो "नाथ हुवे बो जिको सब लोगा रो ध्यान राखे, भूखा ने रोटी देवे, तिरसा ने पाणी पावे, टाबरां रो लाड राखे" जगलो हंस के जवाब दियो "तो थें नाथ हो कई पापा" भोलू बाप रो हाथ झाल के केयो और जगलो बीरी बात पर मुस्कुरा दियो जगले रे घर री हालत इति चोखी कोनी ही, रिपियो तो देखण ने ही कोनी हो। दिन में कोई दस रुपिया कमा'तो जीका री साग सब्जी लियातो। घर री नांव माथे 2 छपरिया हा, बे भी टुटुडा। पर फिर भी बो हमेशा खुश ही लाधतो। घर में बे 4 जना हा । बो, बीरी लुगाई लाछी और बिरो 4-5 सालां रो छोरो ' भोलू ' और एक बकरी जीकी ने बो लाडू केंवतो। जगलो आप तो पढ़ लिख नी पायो पर बिरी इच्छा ही के भोलू ने चोखी इसकुल में ...

गज़ब फकीरा रे!

अरे गजब फकीरा रे अरे गजब फकीरा खेल रचायो माटी रो मोल भाव कर जनता ने भरमायो रे अरे भटक विदेशां नांव कमायो मायड़ रो दुनिया भर में नांव डुबायो रे अरे तू घट मायो ना घी खायो जनता ने धुड़ खड़ा, खुद मशरुमा खावण ने आयो बण के प्रधान भगतां रो माथो खायो गजब फकीरा........ अरे चौकीदारी खूब दिखाई, संपति भारत री खाई जनता ने चंदरू बणा उन्नीस में ऐकर पाछो आयो फेंकन री सीमा को फेंकुमल घणो बतायो गजब फकीरा......... अरे टिकटां बिकती म्हाँ ही देखी, ट्रेना ओ बेच के खाई जनता सड़कां पे लाकर जनता ने ओ मूढ़ बनायो बेचन री तरकीबा रो पार नी पायो गजब फकीरा......... अरे खेत-किसान ने धोखो दिन्हो, रिपिया ने मौको दिन्हों कोरोना जीव लेवग्यो, राम को मंदिर जोर बनायाे चंदो खा कोरोना रो, दाढ़ बढ़ायो गजब फकीरा.........

राजस्थानी शब्दावऴी

राजस्थानी शब्दावऴी दावणा पशु को चरते समय छोड़ने के लिए पैरों में बांधी जाने वाली रस्सी

उभरते चमचे

काल उग्येड़ा बूंटा  पर सुखा इंतजाम  पाणी रेड़े धुड़ में  कादो लेवे काम  काचरा के बीज ज्यूं  तिर तिर उंचा आवे  डोका खांगा हुवे तो कोनी  गढ़ खांगा बतावे  मुंडो कर के छाछ ज्यूं  लेवे लंबो नाम  पाणी रेड़े धुड़ में  कादो लेवे काम  धोळा कुरता घाल गमछिया  बळज्याणा डोळ देखावे  बातां चमचम रसगुल्ला री  मिरच्या लुखी खावे  बिक्या बता के सामले ने  खुद मांगे मोटा दाम  पाणी रेड़े धुड़ में  कादो लेवे काम  बण्या फिरे ऐ क्रांतिकारी  नास्यां उंची चढ़ावे  दो रिपीया रो स्वांग कोनी  चंदो घणो ले जावे  दिन फिरे चमचा रे सागे  रात ने भैरु धाम  पाणी रेड़े धुड़ में  कादो लेवे काम मन में काडे दांत घणा सामी सबरे कूके चार इंच री उंदरी सीधी मुंह पर थूके थूक ने सुख्या टेम नी लागे ए चाट के काडे नाम पाणी रेड़े धूड़ में कादो लेवे काम

इतिहास बांचतो कल्पतरू

ओ भारत है, नव विश्व गुरु इतिहास बांचतो कल्पतरू लाशां नदियां में, रक्त भौम किस बिध ई व्यथा रो बखान करूं नेता तो रकत रा तिरसा है भाला बरसे सत्ता रे घरूं मन खून रा आंसू कूके है मरता री गिणत रो जो ध्यान धरूं जीवत रा प्राण बचावणीया थने पुन पुन 'मेघ' प्रणाम करूं मुर्दा ने नोच के खावणीया  थारे पाप रे घड़ा में रीस भरूं जद घड़ा फूट कर बिखरेला थने वादो म्हें बी दिन रो करूं जद नोच गिरज तने खावे ला बी दिन री नींव म्हें आज धरूं जो युद्ध हुवेगो अगले दिन बी रण भेरी रो गाज करूं म्हारे मृत्यु री इच्छा राखणीया  म्हें आज मरूं ना काल मरूं

चोखो!

" के साख है?" "सांसी हूं बाबूजी" "अठे के लेने आयो है" "तिरसो हूं अन्नदाता" "अठे किं कोनी, जा" और आ बात कह कर जीवन सिंह बी बूढ़े आदमी ने घर री चौखट सु दुत्कार दियो। बो बुढो एक पुराणी घोड़ा गाडी दाईं चरमर करती हड्डियां साथे धीरे धीरे पाछो गे परो, किं कोनी बोल्यो, बस चुपचाप पाछो आ खेल्डी रे नीचे जा के बैठ गियो। सुबह सूं पाणी री एक बूंद गले कोनी उतरी। तिरस इत्ती जादा के अंत सामो दिसे। पर ठाकर तो पाणी पायो कोनी। आज तो गिराहकी भी कोनी हुई। डेण तिरसा मरतो सु गीयो। डेण रो नाम हो चोखाराम, मायता घणे लाड सूं राख्यो पर जात अड़ गी। आज तिरसा मरते ने कोई पाणी भी कोनी पावे। डोकरे ने नींद कोनी आई। जूता पॉलिश आली डब्बिया थैले में घाल के ऊभो हु गियो। अने बने देख्यो और रोड़ माथे चालन लाग ग्यो। बेउंता बेउंता डोकरे ने प्याऊ दिस गि। तिरसा मरतो दौड़यो। प्याऊ रे खन पहुंचतो बी सूं पेला भाठे री ठोकर खा ली, खुंद आ ग्यो।  पर अब प्याऊ खन पुग ग्यो अब तिस मिट ज्यासी सोच के टूंटी में हाथ घालण बढ्यो तो लारूं जीवन सिंह डांग लिया आतो दीस्यो। "ठेर डेण, हाथ ना लगाई टूं...